
ओमान की राजधानी मस्कट एक बार फिर दुनिया की बड़ी कूटनीति का गवाह बनने जा रही है। 6 फरवरी, शुक्रवार से अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत शुरू होने वाली है, जहां शांति, परमाणु समझौते और राजनयिक रिश्तों पर चर्चा संभव है।
पूर्व अमेरिकी राजनयिक Nabeel Khoury ने बातचीत की पुष्टि की है, लेकिन वॉशिंगटन से आया बयान उम्मीदों पर ठंडा पानी डालता दिख रहा है।
ईरान ने जताया ओमान का आभार, निभा रहा है Mediator Role
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि US-Iran nuclear talks शुक्रवार सुबह 10 बजे मस्कट में शुरू होंगी। उन्होंने ओमान सरकार का आभार जताते हुए कहा कि ओमान पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच back-channel diplomacy में अहम भूमिका निभाता रहा है और इस बार भी युद्ध टालने की कोशिश में सीधा मध्यस्थ बनकर सामने आया है।
मतलब साफ है अगर बात बनी, तो ओमान की मेज पर ही बनेगी।
अमेरिका ने रख दी 3 कड़ी शर्तें
जहां ईरान सिर्फ न्यूक्लियर डील पर फोकस चाहता है, वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने बातचीत की शर्तें लंबी कर दी हैं।
रुबियो के मुताबिक, बातचीत में शामिल होंगे ईरान का Ballistic Missile Program, Middle East में आतंकी संगठनों को समर्थन,
ईरान में नागरिकों के साथ सरकार का व्यवहार।
ईरान इन मुद्दों को अपनी संप्रभुता में दखल मानता है, लेकिन फिर भी न्यूक्लियर डील को लेकर limited flexibility दिखाने को तैयार है।

रुबियो बोले– “उम्मीद कम है, लेकिन कोशिश करेंगे”
मार्को रुबियो ने साफ शब्दों में कहा, “अगर ईरान मिलना चाहता है, तो अमेरिका तैयार है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि कोई समझौता हो पाएगा।”
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि बातचीत करने में कोई नुकसान नहीं। यह देखने में बुराई नहीं कि कुछ रास्ता निकल सकता है या नहीं।
यानी, दरवाज़ा खुला है… लेकिन कुंडी ढीली नहीं।
ट्रंप का मैसेज: बात होगी, रियायत नहीं
रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी देश से बातचीत के पक्षधर हैं। चाहे वह विरोधी हो या सहयोगी। लेकिन अमेरिका इन बैठकों को किसी तरह की वैधता या रियायत देने का जरिया नहीं मानता।
बातचीत होगी, मुस्कान होगी… पर भरोसा अभी फाइल में बंद है।
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